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Lyrics #4523

दर्द का पलड़ा

एक भावनात्मक गीत जो बताता है कि लोग रिश्ते क्यों छोड़ते हैं जब दर्द प्यार से ज़्यादा हो जाए, और खामोशी कैसे शब्दों से भी गहरा ज़ख्म देती है। यह मानवीय मनोविज्ञान के दर्द और भ्रम को दर्शाता है।

[Verse 1]
थक कर नहीं कोई मुड़ता कभी,
दिल जब टूटता है सच में तभी।
नज़रें चुराता है, राहें बदलता है,
जब प्यार से ज़्यादा दर्द पिघलता है।
जब प्यार से ज़्यादा दर्द पिघलता है।

[Chorus]
ये है मनोविज्ञान की गहरी बात,
लोग नहीं जाते जब हो जाए रात।
वो तब जाते जब दर्द का पलड़ा भारी हो,
मोहब्बत की चादर जब तार-तार हो।

[Verse 2]
शब्दों के वार से भी गहरा ज़ख्म,
खामोशी देती है जब बन जाए बम।
हर अनकही बात, एक सवाल बन जाए,
दर्द के साथ जब मन उलझ जाए।
ये सन्नाटा दिल को तोड़ जाए।

[Chorus]
ये है मनोविज्ञान की गहरी बात,
लोग नहीं जाते जब हो जाए रात।
वो तब जाते जब दर्द का पलड़ा भारी हो,
मोहब्बत की चादर जब तार-तार हो।

[Bridge]
भ्रम और पीड़ा का ये कैसा संगम,
ना रो सकूँ, ना मुस्कुरा सकूँ थम।
मन पूछता है क्या थी मेरी ख़ता,
जब जवाब में बस मिलती है सन्नाटा।

[Chorus]
ये है मनोविज्ञान की गहरी बात,
लोग नहीं जाते जब हो जाए रात।
वो तब जाते जब दर्द का पलड़ा भारी हो,
मोहब्बत की चादर जब तार-तार हो।

[Outro]
हाँ, दर्द का पलड़ा, जब भारी हो जाए...
प्यार से ज़्यादा, जब सहना पड़ जाए...
तभी कोई जाता है...
तभी दिल टूट जाता है।
Prompt: Psychology facts jo sabko pata hone chahiy Fact 1: Log tab nahi jaate jab wo thak jaate hai,wo tab jaate hai jab pain zyada ho jata hai love se act 2: Ignore kiya hua insaanapne dimaag mein kahaaniyan bana leta hai, sirf feel hone ke liye Fact 3: Silent treatment insults se zyada dard deta hai.Kyuki waha dard ke saath confusion bhi hota hai Agar ye suna aur dil hil gaya… follow kar lo.
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